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wonder of nature: kawadiya pahad

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इंदौर के पास देवास ज़िले के पोटला पिपरी के घने जंगल के बिच बना एक रहस्यमयी पहाड़, कावड़िया पहाड़  कावड़िया पहाड़ को लेकर कई अलग अलग कहानिया और अलग अलग मान्यता है| पहाड़ को देख लगता है मनो जैसे किसी कलाकार ने इन्हे तराश कर वहॉ जमाया हो | कुछ लोग इसे वंडर ऑफ़ नेचर कहते है तो कुछ का मानना ये भी है की इसे यहां भीम ने लाकर रखे है|  कावड़िया पहाड़ की एक और खासियत यह भी है की इन्हे ठोक ने पर ऐसी आवाज़ आती है जैसे किसी लोहे की चीज़ को ठोक रहे हो |  लोगो का मानना ये है की महाभारत काल में पांडव पुत्र भीम ये चट्टान लेकर आये थे और यहाँ जमाये थे, उनका मकसद शायद इनसे महल बनाने का था|  कावड़िया पहाड़ इंदौर से 75 किमी की दुरी पर है, इंदौर से उदयनगर होते हुए पोटला से पिपरी से 1 किमी जंगल में आता है कावड़िया पहाड़| 

udaipur- city of lakes

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बड़े बड़े पहाड़ो के बिच बसा उदयपुर जिसे झीलों का शहर भी कहा जाता है| उदयपुर आलीशान महलो, झीलों और बगीचों से भरा एक ऐतिहासिक शहर है| महाराणा उदय सिंह के नाम पर बसा ये शहर जिससे 1559  में महाराणा उदय सिंह ने बसाया था जब वे चित्तौड़गढ़ छोड़ आये थे|  मुग़लो के चित्तोड़ पर आक्रमण के बाद जब चित्तोड़ पूरा तहस नहस होगया था तब राणा उदय सिंह ने  आयड़ नदी के किनारे उदयपुर शहर बसाकर, उसे मेवाड़ की राजधानी बनाया। उदयपुर का इतिहास बताता सिटी पैलेस जो एक बहुत ही आलीशान महल है जिससे राणा उदय सिंह और उनके परिवार ने बनाया था जो छोटे बड़े चार हिस्सों में बना जिससे अलग अलग राणाओ ने पूरा किया| उदयपुर छटवा राजस्थान का सबसे बड़ा शहर है| जैसा सभी जानते है उदयपुर "सिटी ऑफ़ लेक्स" भी कहा जाता है यहाँ 5 सबसे प्रसिद्ध झील है, फ़तेह सागर लेक, पिछोला लेक, स्वरुप सागर लेक, रंगसागर और दूध तलाई लेक|  सिटी पैलेस पिछोला झील किनारे बना सिटी पैलेस जिसकी गिनती कही बड़े महलो के साथ होती है| सिटी पैलेस एक ऐसा महल है जिससे अलग अलग राजाओ ने अलग अलग हिस्सै में बनवाया था, इसका निर्माण 1559 में राणा उदय ...

valley of flower, uttarakhand

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                        valley of flowers, uttarakhand कही प्रजाति के फूल और हरे भरे पहाड़ो से सजे उत्तराखंड का "वैली ऑफ़ फ्लावर" जिसे देखने का मजा सिर्फ बारिश के मौसम में आता है| क्योकि बारिश में हर तरफ हरियाली होजाती है और बहुत तरह के फूल खिल आते है| जैसे वाइल्ड रोज, ब्लू कोरिडालिस, सेक्सीफ्रागे, ,गेरनियंस आदि जुलाई सही मौसम है वैली ऑफ़ फ्लावर को घूमने का|  कैसे पहुचे   सबसे पास देहरादून एयरपोर्ट है जो 295 किमी है और   ऋषिकेश रेलवे स्टेशन जो 276 किमी है  वहां से सड़क मार्ग जो गोविन्द घाट होते हुए जाता है|  

अहमदाबाद की झूलती मीनार

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अहमदाबाद की झूलती मीनार   भारत एक ऐसा देश है जहा सभी धर्म के लोग रहते है| भारत देश में धार्मिक महत्व के कई प्राचीन स्थल है| उनमे कई स्थानो से जुडी मान्यता जितनी गहरी है उनका निर्माण भी उतना ही चर्चित रहा है| गुजरात के अहमदाबाद में स्थित "सीदी बशीर मस्जिद" को झूलती मीनार के नाम से भी जाना जाता है| यहाँ किसी भी एक मीनार को हिलने पर दूसरी अपने आप हिलने लगती है| इसे देखने लोग दूर-दूर से आते है| आपको जान कर अश्चर्य होगा की अनेक बार भूकंप के झटके से यहाँ की जमीन हिली, लेकिन ये मीनार जस की तस खड़ी रही| विशेषज्ञ इसे कुछ भी कहे लेकिन लोगो के लिए ये अजूबा है| यहाँ आने वाले लोग इसे खुदा का करिश्मा बताते है|  क्या है रहस्य : कुछ जानकारों ने मीनार के हिलने का रहस्य बताया है| उनके अनुसार इसके निर्माण में ऐसे पत्थर का प्रयोग किया गया है जो लचीले है| ऐसे पत्थर अब नहीं पाए जाते किंतु शायद उस समय इन्ही लचीले पत्थर का प्रयोग मस्जिद निर्माण में किया गया है|    

travel roopkund

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रूपकुंड  जिसे मिस्ट्री लेक भी कहा जाता है| ये एक ग्लैसिअल लेक है जों उत्तराखंड प्रदेश में आता है| रूपकुंड जो त्रिशूल के आकर में बने पहाड़ो के बिच है| कही सालो पहले झील के तल से भोत सरे मानव कंकाल मिले थे| रूपकुंड समुद्री सतह से 15,700 फ़ीट उप्पर है| ये झील रॉक-स्त्रवण ग्लाइडस से घिरा हुआ है| रूपकुंड ट्रैकिंग के लिए भोत प्रसिद्ध स्थान माना जाता है| यहां से दिखने वाला नजारा जैसे केदारनाथ, चौखम्बा, नीलकंठ,और नंदी घुंटी जैसा है|  roopkund lake क्षेत्र: उत्तराखंड  उचाई: 15,700 फ़ीट    ट्रेक की दुरी: 54 किमी    ट्रेक की शुरवात: लोहाजंग    दिन: 7 लगभग    यहाँ जाने का सबसे अच्छा समय जून महीने का होता है|    कैसे पहुंचे:   रूपकुंड पहुंचने का कोई सड़क मार्ग नहीं है| यहाँ 23 किमी ट्रेक करके पंहुचा जा सकता है|  आखरी सड़क मार्ग वैन विलेज तक है|    सड़क मार्ग : दिल्ली से किसी भी प्राइवेट  कार, जीप से हरिद्धार होते हुए यह पहुचा जा सकता है| 530 किमी दिल्ली से हरिद्धार के...