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wonder of nature: kawadiya pahad

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इंदौर के पास देवास ज़िले के पोटला पिपरी के घने जंगल के बिच बना एक रहस्यमयी पहाड़, कावड़िया पहाड़  कावड़िया पहाड़ को लेकर कई अलग अलग कहानिया और अलग अलग मान्यता है| पहाड़ को देख लगता है मनो जैसे किसी कलाकार ने इन्हे तराश कर वहॉ जमाया हो | कुछ लोग इसे वंडर ऑफ़ नेचर कहते है तो कुछ का मानना ये भी है की इसे यहां भीम ने लाकर रखे है|  कावड़िया पहाड़ की एक और खासियत यह भी है की इन्हे ठोक ने पर ऐसी आवाज़ आती है जैसे किसी लोहे की चीज़ को ठोक रहे हो |  लोगो का मानना ये है की महाभारत काल में पांडव पुत्र भीम ये चट्टान लेकर आये थे और यहाँ जमाये थे, उनका मकसद शायद इनसे महल बनाने का था|  कावड़िया पहाड़ इंदौर से 75 किमी की दुरी पर है, इंदौर से उदयनगर होते हुए पोटला से पिपरी से 1 किमी जंगल में आता है कावड़िया पहाड़| 

chikhaldara...

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महाराष्ट्र के अमरावती डिस्ट्रिक्ट में बसा एक छोटा हिल स्टेशन चिखलदरा|  खूबसूरत पहाड़ और घने जंगल के बिच बसा चिखलदरा जहाँ कई झरने, बगीचे, जंगल सफारी, सनसेट पॉइंट, और मंदिर है जिससे देखने लोग दूर दूर से आते है| चिखलदरा की खासियत ये है की यहां दो दिन में अच्छे से घुमा जा सकता है| पांडव पुत्र भीम ने  कीचका का वध भी चिखलदरा में किया था, जिससे चिखलदरा का नाम कीचकादारा पड़ गया था जिससे बाद में चिखलदरा करदिया गया|  चिखलदरा के जंगल में कही जंगली जानवर पाए जाते है जेसे टाइगर, पैंथर, सांबर, जंगली गाये आदि|  चिखलदरा घूमने का सही समय बारिश और ठंड का है|  यहां रुकने के लिए कही होटल और रिसॉर्ट्स है|    चिखलदरा जाने के लिए खंडवा, बैतूल, अकोला, अमरावती होते हुए जा सकते है|  हवाई अड्डा नागपुर चिखलदरा से सबसे करीब है| चिखलदरा में कॉफ़ी की भी खेती होती है जो महाराष्ट्र में सिर्फ यही होती है| चिखलदरा में घूमने की जगह  मेलघाट टाइगर रिज़र्व  भीमकुण्ड (जहा भीम ने कीचका का वध कर अपने हाथ धोये थे) गावलीअद फोर्ट...

अहमदाबाद की झूलती मीनार

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अहमदाबाद की झूलती मीनार   भारत एक ऐसा देश है जहा सभी धर्म के लोग रहते है| भारत देश में धार्मिक महत्व के कई प्राचीन स्थल है| उनमे कई स्थानो से जुडी मान्यता जितनी गहरी है उनका निर्माण भी उतना ही चर्चित रहा है| गुजरात के अहमदाबाद में स्थित "सीदी बशीर मस्जिद" को झूलती मीनार के नाम से भी जाना जाता है| यहाँ किसी भी एक मीनार को हिलने पर दूसरी अपने आप हिलने लगती है| इसे देखने लोग दूर-दूर से आते है| आपको जान कर अश्चर्य होगा की अनेक बार भूकंप के झटके से यहाँ की जमीन हिली, लेकिन ये मीनार जस की तस खड़ी रही| विशेषज्ञ इसे कुछ भी कहे लेकिन लोगो के लिए ये अजूबा है| यहाँ आने वाले लोग इसे खुदा का करिश्मा बताते है|  क्या है रहस्य : कुछ जानकारों ने मीनार के हिलने का रहस्य बताया है| उनके अनुसार इसके निर्माण में ऐसे पत्थर का प्रयोग किया गया है जो लचीले है| ऐसे पत्थर अब नहीं पाए जाते किंतु शायद उस समय इन्ही लचीले पत्थर का प्रयोग मस्जिद निर्माण में किया गया है|    

travel roopkund

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रूपकुंड  जिसे मिस्ट्री लेक भी कहा जाता है| ये एक ग्लैसिअल लेक है जों उत्तराखंड प्रदेश में आता है| रूपकुंड जो त्रिशूल के आकर में बने पहाड़ो के बिच है| कही सालो पहले झील के तल से भोत सरे मानव कंकाल मिले थे| रूपकुंड समुद्री सतह से 15,700 फ़ीट उप्पर है| ये झील रॉक-स्त्रवण ग्लाइडस से घिरा हुआ है| रूपकुंड ट्रैकिंग के लिए भोत प्रसिद्ध स्थान माना जाता है| यहां से दिखने वाला नजारा जैसे केदारनाथ, चौखम्बा, नीलकंठ,और नंदी घुंटी जैसा है|  roopkund lake क्षेत्र: उत्तराखंड  उचाई: 15,700 फ़ीट    ट्रेक की दुरी: 54 किमी    ट्रेक की शुरवात: लोहाजंग    दिन: 7 लगभग    यहाँ जाने का सबसे अच्छा समय जून महीने का होता है|    कैसे पहुंचे:   रूपकुंड पहुंचने का कोई सड़क मार्ग नहीं है| यहाँ 23 किमी ट्रेक करके पंहुचा जा सकता है|  आखरी सड़क मार्ग वैन विलेज तक है|    सड़क मार्ग : दिल्ली से किसी भी प्राइवेट  कार, जीप से हरिद्धार होते हुए यह पहुचा जा सकता है| 530 किमी दिल्ली से हरिद्धार के...